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हिमाचल में बनी 63 दवाओं के सैंपल फेल, पंजाब-हरियाणा की दवाएं भी अलर्ट में; कंपनियों को नोटिस और बैच वापस लेने की कार्रवाई

CDSCO के अगस्त ड्रग अलर्ट में हिमाचल की 63 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल
सिरप, एंटीबायोटिक, हार्ट-किडनी, आंखों की दवाएं और इंजेक्शन भी सूची में
संबंधित कंपनियों को नोटिस, प्रभावित बैचों की बिक्री और वितरण रोकने की कार्रवाई


नालागढ़। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अगस्त 2026 के ड्रग अलर्ट में देशभर में बड़ी संख्या में दवाओं के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। जारी रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में बनी 63 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। इनमें बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले सिरप, पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक, बुखार और खांसी की दवाओं के अलावा हार्ट, किडनी, पेट और आंखों से संबंधित दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद भी शामिल बताए गए हैं। संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई शुरू की गई है और प्रभावित बैचों को बाजार से वापस लेने की प्रक्रिया की जा रही है।

अगस्त के ड्रग अलर्ट में देशभर में 221 दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के नमूने गुणवत्ता मानकों पर असफल बताए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इनमें 191 नमूनों की जांच राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में, जबकि 29 नमूनों की जांच केंद्रीय प्रयोगशालाओं में हुई। हिमाचल की दवा निर्माण इकाइयों से जुड़े नमूनों की संख्या इस सूची में उल्लेखनीय रही है।

हिमाचल के कई औद्योगिक क्षेत्रों की दवाएं सूची में

हिमाचल में गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए उत्पादों का संबंध राज्य के प्रमुख फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब से बताया गया है। इनमें बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में देश और दूसरे राज्यों के लिए बड़ी मात्रा में दवा उत्पादन होता है।

जारी रिपोर्टों में गुणवत्ता से संबंधित अलग-अलग तरह की कमियां सामने आने की बात कही गई है। इनमें assay content, dissolution और description में variation जैसी कमियां शामिल हैं। कुछ मामलों में इंजेक्शन में particulate matter यानी अवांछित कण पाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

बच्चों की दवा और पैरासिटामोल का सैंपल भी फेल

अगस्त के अलर्ट में हिमाचल में निर्मित Paracetamol Pediatric Oral Suspension का नमूना भी गुणवत्ता परीक्षण में असफल बताया गया है। यह बच्चों में बुखार और दर्द के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित उत्पाद बद्दी के भुड्ड क्षेत्र में स्थित एक निर्माण इकाई में बनाया गया था।

यहां यह समझना जरूरी है कि किसी दवा का सैंपल Not of Standard Quality (NSQ) पाए जाने का अर्थ यह है कि जांच के दौरान वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों में से एक या अधिक पैरामीटर पर खरा नहीं उतरा। इसका अर्थ अपने आप यह नहीं होता कि सूची में शामिल हर दवा हर परिस्थिति में मरीज के लिए समान स्तर का खतरा पैदा करती है। अलग-अलग उत्पादों में कमी की प्रकृति और उसका महत्व अलग हो सकता है।

इंजेक्शन में भी सामने आई गुणवत्ता संबंधी समस्या

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ इंजेक्शन में particulate matter पाए जाने की बात सामने आई है। इनमें Amikacin Sulphate, Rabeprazole Sodium और Meropenem जैसे इंजेक्शन शामिल बताए गए हैं। ये अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं हैं। इंजेक्शन में अवांछित कणों की मौजूदगी को नियामकीय दृष्टि से गंभीर गुणवत्ता समस्या माना जाता है।

ऐसे मामलों में दवा की गुणवत्ता की जांच केवल निर्माण प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संबंधित बैच की पहचान, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और उसकी वापसी जैसी कार्रवाई भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

कंपनियों को कारण बताओ नोटिस

हिमाचल के स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि गुणवत्ता जांच में असफल नमूनों से संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के साथ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई है। कंपनियों से उनका पक्ष मांगा गया है और बाजार में भेजे गए संबंधित स्टॉक को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गुणवत्ता जांच में असफल घोषित बैच आगे बाजार में वितरित न हों। CDSCO और राज्य औषधि नियंत्रण व्यवस्था का ड्रग अलर्ट इसी तरह के गुणवत्ता संबंधी मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने और नियामकीय कार्रवाई को आगे बढ़ाने का माध्यम है। CDSCO अपनी वेबसाइट पर ड्रग अलर्ट और अन्य नियामकीय सूचनाएं प्रकाशित करता है।

पंजाब और हरियाणा की दवाएं भी अलर्ट में

अगस्त के ड्रग अलर्ट की राज्यवार जानकारी में पंजाब और हरियाणा में निर्मित दवाओं के नमूनों के भी गुणवत्ता जांच में असफल पाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट में हिमाचल के 63, हरियाणा के 11 और पंजाब के आठ नमूनों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, यहां आंकड़ों को लेकर एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है। उपलब्ध रिपोर्टों में देशभर के कुल नमूनों की संख्या और हिमाचल के नमूनों की संख्या में भी मामूली अंतर दिखाई देता है। एक अन्य रिपोर्ट में अगस्त अलर्ट के लिए 220 राष्ट्रीय नमूनों और हिमाचल के 62 नमूनों का आंकड़ा दिया गया है, जबकि दूसरी रिपोर्ट में 221 और 63 का उल्लेख है। इसलिए प्रकाशित आंकड़ों को संबंधित मूल CDSCO अलर्ट की अंतिम सूची के संदर्भ में देखना जरूरी है।

दवाओं की गुणवत्ता को लेकर फिर उठे सवाल

हिमाचल प्रदेश लंबे समय से देश के प्रमुख फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल रहा है, खासकर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयां संचालित होती हैं। ऐसे में गुणवत्ता जांच में बार-बार सामने आने वाले असफल नमूनों से नियामकीय निगरानी और निर्माण प्रक्रिया पर ध्यान बढ़ता है। इससे पहले अगस्त 2026 में जारी एक अन्य राष्ट्रीय ड्रग अलर्ट में भी हिमाचल में निर्मित बड़ी संख्या में दवाओं के नमूने गुणवत्ता मानकों पर असफल बताए गए थे।

हालांकि, किसी एक अलर्ट में नमूने फेल होने के आधार पर पूरे राज्य की दवा इंडस्ट्री या सभी कंपनियों के उत्पादों की गुणवत्ता के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। नियामकीय जांच विशिष्ट उत्पाद और बैच के स्तर पर होती है और कार्रवाई भी संबंधित नमूने तथा निर्माण इकाई के आधार पर की जाती है।

मरीजों के लिए क्या जरूरी है

ड्रग अलर्ट में किसी विशेष दवा या बैच का नाम सामने आने पर मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनी नियमित दवा बंद नहीं करनी चाहिए। यदि किसी मरीज के पास अलर्ट में बताए गए उत्पाद का वही बैच मौजूद है, तो वह डॉक्टर, फार्मासिस्ट या संबंधित स्वास्थ्य विभाग से बैच की पुष्टि और आगे की सलाह ले सकता है।

वहीं, दवा निर्माता कंपनियों के लिए प्रभावित बैच की पहचान, बाजार से स्टॉक वापस लेना और नियामकीय एजेंसियों को जवाब देना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। राज्य औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से संबंधित कंपनियों पर नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।